NSE ने F&O से हटाए 8 बड़े स्टॉक्स: जानें 29 अगस्त 2025 से लागू नए नियम और इसका असर

Table of Contents

  📚 अनुक्रमणिका (Table of Contents): NSE F&O से हटे स्टॉक्स

  1. NSE का नया आदेश: क्या हुआ बदलाव?

  2. F&O से हटाए गए 8 स्टॉक्स की लिस्ट

  3. ये बदलाव कब से होंगे लागू?

  4. मौजूदा F&O कॉन्ट्रैक्ट्स का क्या होगा?

  5. ट्रेडर्स और निवेशकों पर असर

  6. F&O से स्टॉक्स को क्यों हटाया जाता है?

  7. SEBI की भूमिका और नियम

  8. F&O कॉन्ट्रैक्ट्स क्या होते हैं?

  9. निष्कर्ष: क्या करें निवेशक?


   📰 1. NSE का नया आदेश: क्या हुआ बदलाव?: NSE F&O से हटे स्टॉक्स

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने 24 जून 2025 को घोषणा की कि 8 कंपनियों को 29 अगस्त 2025 से Futures and Options (F&O) सेगमेंट से हटा दिया जाएगा। यह बदलाव निवेशकों और डेरिवेटिव्स में ट्रेड करने वालों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

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  📃 2. F&O से हटाए गए 8 स्टॉक्स की लिस्ट: NSE F&O से हटे स्टॉक्स

इन कंपनियों को 29 अगस्त 2025 से F&O ट्रेडिंग से हटा दिया जाएगा:

  1. Aditya Birla Fashion and Retail Ltd.

  2. Adani Total Gas Ltd.

  3. CESC Ltd.

  4. Granules India Ltd.

  5. IRB Infrastructure Developers Ltd.

  6. Jindal Stainless Ltd.

  7. Poonawalla Fincorp Ltd.

  8. SJVN Ltd.


  ⏰ 3. ये बदलाव कब से होंगे लागू?: NSE F&O से हटे स्टॉक्स

➡️ 29 अगस्त 2025 से इन स्टॉक्स में F&O सेगमेंट में कोई नया कॉन्ट्रैक्ट शुरू नहीं होगा।
➡️ मौजूदा जून, जुलाई और अगस्त 2025 एक्सपायरी वाले F&O कॉन्ट्रैक्ट्स तब तक ट्रेड होते रहेंगे जब तक उनकी वैधता समाप्त नहीं हो जाती।


   🔁 4. मौजूदा F&O कॉन्ट्रैक्ट्स का क्या होगा?: NSE F&O से हटे स्टॉक्स

  • जून, जुलाई और अगस्त 2025 के मौजूदा अनुबंध ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध रहेंगे

  • इन कॉन्ट्रैक्ट्स में नई स्ट्राइक प्राइस भी जोड़ी जा सकती हैं

  • लेकिन 29 अगस्त के बाद नए कॉन्ट्रैक्ट्स शुरू नहीं होंगे


  👨‍💼 5. ट्रेडर्स और निवेशकों पर असर:  NSE F&O से हटे स्टॉक्स

  • ट्रेडर्स इन स्टॉक्स में F&O सेगमेंट में नई पोजिशन नहीं बना सकेंगे

  • केवल कैश मार्केट (स्पॉट मार्केट) में ही अब इन शेयरों में ट्रेडिंग होगी

  • जोखिम नियंत्रण के लिए ये फैसला लिया गया है

  • जिन निवेशकों की पोजिशन F&O में पहले से है, उन्हें ध्यानपूर्वक एक्ज़िट प्लान बनाना चाहिए


   📉 6. F&O से स्टॉक्स को क्यों हटाया जाता है?:  NSE F&O से हटे स्टॉक्स

NSE आमतौर पर किसी स्टॉक को F&O से हटाने का निर्णय तब लेता है जब:

  • उस स्टॉक में कम लिक्विडिटी होती है

  • ट्रेडिंग वॉल्यूम और ओपन इंटरेस्ट बहुत कम होता है

  • अधिक वोलैटिलिटी और जोखिम से बाजार की स्थिरता पर असर पड़ता है

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यह कदम बाजार में प्रभावशीलता और सुरक्षा बनाए रखने के लिए होता है।


   🏦 7. SEBI की भूमिका और नियम:  NSE F&O से हटे स्टॉक्स

SEBI (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) F&O सेगमेंट के लिए नियम बनाता है:

  • स्टॉक्स का औसत मार्केट कैप

  • लिक्विडिटी

  • वॉल्यूम

  • जोखिम संकेतक
    इन मापदंडों को ध्यान में रखकर NSE निर्णय लेता है।


   📘 8. F&O कॉन्ट्रैक्ट्स क्या होते हैं? (सिंपल शब्दों में):  NSE F&O से हटे स्टॉक्स

  • Futures Contract: एक एग्रीमेंट जिसमें खरीदार और विक्रेता भविष्य की तारीख पर एक निश्चित कीमत पर एसेट खरीदने या बेचने के लिए बाध्य होते हैं।

  • Options Contract: इसमें होल्डर को भविष्य की तारीख तक एक निश्चित कीमत पर एसेट खरीदने या बेचने का अधिकार होता है, कोई बाध्यता नहीं होती।


   ✅ 9. निष्कर्ष: निवेशकों को क्या करना चाहिए?:  NSE F&O से हटे स्टॉक्स

  • जिनके पास इन कंपनियों के F&O कॉन्ट्रैक्ट्स हैं, वे एक्सपायरी से पहले पोजीशन क्लोज करें

  • कैश सेगमेंट में निवेश जारी रख सकते हैं

  • किसी भी निवेश निर्णय से पहले मार्केट एनालिसिस और रिस्क का मूल्यांकन ज़रूर करें

  • लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह कोई नकारात्मक संकेत नहीं है, बल्कि F&O से हटना अस्थायी भी हो सकता है

 

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